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हाँ, किन शर्तों पर
हाँ। मंगलिक और गैर-मंगलिक की शादी होती है। मंगल लग्न, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो मांगलिक कहते हैं। शादी इस एक बात से रुकती नहीं।
परिभाषा — मंगल दोष क्या है। गुण — 36 में कितने। मिलान — वर-वधु कुंडली।
कौन से 5 भाव मंगलिक बनाते हैं
| मंगल का भाव | परंपरा में चर्चा |
|---|---|
| 1 लग्न | स्वभाव तेज, मांगलिक की प्रचलित सूची में |
| 4 घर | घर और सुख पर चर्चा |
| 7 विवाह | साथी वाले भाव में मंगल |
| 8 आयु | परिवर्तन वाले भाव में मंगल |
| 12 व्यय | विदेश या बिस्तर वाले भाव में मंगल |
| अपनी राशि या उच्च | मेष, वृश्चिक या मकर का मंगल — दोष हल्का पढ़ने की चर्चा |
| दोनों मांगलिक | कई परिवार सम दोष को संतुलन मानते हैं |
| उम्र 28 के आसपास | कुछ परंपराएँ दोष हल्का मानती हैं |
मंगल का बल — मंगल कमजोर होने के संकेत। नाड़ी अलग परत है — नाड़ी दोष।
लड़का मंगलिक, लड़की नहीं
लड़के का मंगल सातवें में हो और लड़की का किसी और भाव में, तो परिवार रुकते हैं। देखने वाली बातें: लड़की के चार्ट में मंगल कहाँ है, गुरु की दृष्टि है या नहीं, और 36 गुण में नाड़ी-भकूट बचे हैं या नहीं। एक तरफ़ मंगल होना अकेले रिश्ता रोकने का नियम नहीं है।
लड़की मंगलिक, लड़का नहीं
उलटी स्थिति में भी वही पाँच भाव देखे जाते हैं। लड़की के मंगल को अलग कानून नहीं माना जाता। दोनों कुंडलियों में मंगल का भाव, शुक्र और सातवें का स्वामी साथ पढ़ें। कुंडली मिलान कैसे होता है।
दोनों कुंडलियों में मंगल का भाव देखें
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मंगलिक और गैर-मंगलिक की शादी हो सकती है?
हाँ। मंगल लग्न, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो मांगलिक कहते हैं। यह मिलान की एक परत है। गुण मिलान, उम्र, दोनों चार्ट और दोनों की सहमति साथ देखी जाती है।
मंगलिक किसे कहते हैं?
प्रचलित रीति में मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो। दूसरे, तीसरे, पाँचवें, छठे, नौवें, दसवें या ग्यारहवें में हो तो इस परिभाषा में मांगलिक नहीं कहते।
दोनों मंगलिक हों तो क्या माना जाता है?
कई परिवार दोनों तरफ एक जैसा मंगल दोष होने को संतुलन मानते हैं। यह गारंटी नहीं है। नाड़ी, भकूट और बाकी गुण फिर भी गिने जाते हैं।
उम्र 28 के बाद क्या परंपरा कहती है?
कुछ परंपराएँ मानती हैं कि मंगल की उम्र 28 के आसपास दोष हल्का पढ़ा जाए। मत एक नहीं है। कुंडली में मंगल की राशि और दृष्टि फिर भी देखी जाती है।
क्या पूजा से नाम कट जाता है?
पूजा आस्था का विषय है। विवाह कानून और दोनों की सहमति से होता है। चार्ट में मंगल का भाव पूजा से मिटता नहीं, पढ़ने का तरीका बदलता है।
निष्कर्ष
मंगलिक-गैर मंगलिक शादी संभव है। मंगल एक परत है; सहमति पूरी कहानी है।
PhD ज्योतिषाचार्य परामर्श
दोनों चार्ट में मंगल देख सकते हैं। शादी मना या हां की गारंटी नहीं।
पंडित जी से बात करेंमंगल दोष सामाजिक-धार्मिक चर्चा है। विवाह कानूनी सहमति से होता है।