📋 विषय सूची
नवरात्रि 2026 क्या है?
नवरात्रि 2026 देवी दुर्गा के नौ रूपों का पर्व है। शरद ऋतु वाली शारदीय नवरात्रि गरबा-दुर्गा पूजा से जानी जाती है। चैत्र वाली वसंत नवरात्रि हिंदू नववर्ष और राम नवमी से जुड़ती है।
यह धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व है। ज्योतिष इसे साधना का समय कह सकता है, नौकरी या विवाह की गारंटी नहीं। पितृ पक्ष के बाद शारदीय नवरात्रि आती है — पितृ पक्ष 2026।
चैत्र और शारदीय तिथियाँ
नीचे प्रचलित पंचांग अनुमान हैं। अंतिम मुहूर्त अपने शहर के पंचांग से मिलाएँ।
| पर्व | लगभग तिथि (2026) | नोट |
|---|---|---|
| चैत्र नवरात्रि | 19–27 मार्च | अंत राम नवमी के आसपास |
| शारदीय नवरात्रि | 11–19 अक्तूबर | घटस्थापना पहले दिन |
| विजयादशमी | लगभग 20 अक्तूबर | दशहरा |
व्रत और सावधानी
- ▸मधुमेह, गर्भावस्था, बच्चों को सख्त उपवास न थोपें।
- ▸फल-दूध-सेंधा नमक परिवार की रीति से; पानी पिएँ।
- ▸कन्या पूजा आष्टमी/नवमी — सम्मान से, दिखावे से नहीं।
- ▸मन शांत रखने के उपाय अलग लेख में हैं।
ज्योतिष दृष्टि
कुछ परंपराएँ नवरात्रि में नवदुर्गा और नवग्रह साधना जोड़ती हैं। यह भक्ति है, दशा बदलने का प्रमाण नहीं। व्यक्तिगत मुहूर्त कुंडली से — मुफ्त कुंडली, घर का वास्तु (पूजा कोना)।
पर्व के साथ जन्म कुंडली देखें
🪷 प्रीमियम कुंडली अब सिर्फ ₹11 में।अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवरात्रि 2026 कब है?
चैत्र नवरात्रि लगभग 19–27 मार्च 2026। शारदीय नवरात्रि लगभग 11–19 अक्तूबर 2026, विजयादशमी 20 अक्तूबर के आसपास। शहर और पंचांग से एक दिन सरक सकता है।
कौन सी नवरात्रि मुख्य मानी जाती है?
उत्तर भारत में शारदीय (शरद) नवरात्रि सबसे चर्चित है। चैत्र वसंत नवरात्रि है और राम नवमी से जुड़ती है। गुप्त नवरात्रि अलग साधना काल हैं।
घटस्थापना कब करें?
प्रथम प्रतिपदा की प्रातः मुहूर्त पंचांग से देखें। समय स्थान अनुसार बदलता है। घर में कलश साफ चौकी पर रखें।
क्या नवरात्रि में ग्रह दोष कटते हैं?
श्रद्धा और व्रत अनुशासन देते हैं। दोष “कटने” की गारंटी नहीं। स्वास्थ्य खराब हो तो व्रत न थोपें।
निष्कर्ष
नवरात्रि 2026 में चैत्र मार्च और शारदीय अक्तूबर के दो चक्र याद रखें। तिथि पंचांग से कन्फर्म करें। व्रत भक्ति है, स्वास्थ्य से समझौता नहीं।
PhD ज्योतिषाचार्य परामर्श
पर्व मुहूर्त व्यक्तिगत कुंडली से देखने के लिए सलाह ले सकते हैं।
📞पंडित जी से बात करेंतिथियाँ पंचांग अनुमान हैं। स्थानीय पुरोहित से पुष्टि करें।