📋 विषय सूची
ग्रहण क्या है?
ग्रहण 2026 में विज्ञान साफ है: सूर्य ग्रहण अमावस्या पर चंद्र सूर्य को ढके, चंद्र ग्रहण पूर्णिमा पर पृथ्वी की छाया चंद्र पर पड़े। ज्योतिष राहु-केतु से जोड़ता है। दोनों भाषाएँ मिलाकर डर न फैलाएँ।
राहु-केतु — कुंडली पर असर। सूर्य ग्रहण अमावस्या से जुड़ा — अमावस्या 2026।
2026 की चार तिथियाँ
नासा/खगोल कैलेंडर के अनुसार 2026 में दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण। घंटे IST शहर से बदलते हैं।
| तिथि | प्रकार | भारत (सामान्य) |
|---|---|---|
| 17 फरवरी | वलयाकार सूर्य ग्रहण | सामान्यतः नहीं दिखता |
| 3 मार्च | पूर्ण चंद्र ग्रहण | कुछ क्षेत्रों में आंशिक/उदयास्त पर |
| 12 अगस्त | पूर्ण सूर्य ग्रहण | भारत में नहीं (यूरोप/आर्कटिक पट्टी) |
| 28 अगस्त | आंशिक चंद्र ग्रहण | दृश्यता समय-स्थान पर निर्भर; पंचांग देखें |
12 अगस्त सावन के आसपास पड़ता है — सावन 2026। मुहूर्त — शुभ मुहूर्त।
सूतक और सावधानी
सूतक धार्मिक रीति है, खगोल नियम नहीं। सूर्य को नंगी आँखों से न देखें — यह स्वास्थ्य है, ग्रहण-फल नहीं। भोजन-पूजा परिवार की रीति से। गर्भावस्था में चिकित्सक की बात मानें, वायरल डर की नहीं — स्वास्थ्य लेख।
जन्म कुंडली गोचर से मिलाएँ, अफवाह से नहीं
🔮 मुफ्त कुंडलीअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
निष्कर्ष
ग्रहण 2026 — कब और क्या असर चार तिथियाँ याद रखें। दिखे तो आँख बचाएँ। सूतक रीति है, आपदा नहीं।
PhD ज्योतिषाचार्य परामर्श
ग्रहण गोचर व्यक्तिगत चार्ट पर पढ़ने के लिए सलाह ले सकते हैं। आपदा की भविष्यवाणी नहीं।
तिथियाँ खगोल कैलेंडर पर हैं। आँखों की सुरक्षा: सूर्य बिना फिल्टर न देखें।