केतु क्या?
केतु कमजोर या अशुभ होने के संकेत — केतु दक्षिण पात है, राहु से हमेशा सातवाँ। नैसर्गिक क्रूर सूची में आता है, पर वैराग्य-ज्ञान की भाषा भी ग्रंथों में है। ‘कमजोर’ सप्त ग्रह जितना स्पष्ट नहीं।
जोड़ी — राहु-केतु असर। राहु मोह — राहु संकेत।
संकेत
| विषय | संतुलित बात |
|---|---|
| छाया | राहु का विपरीत पात |
| उच्च-नीच | मतभेद (कुछ वृश्चिक उच्च कहते हैं) |
| लोक अशुभ | भ्रम, कटाव, अनिर्णय |
| अन्य भाषा | वैराग्य, सूक्ष्म विद्या, शोध |
केतु नक्षत्र — अश्विनी · मघा। कालसर्प — कालसर्प दोष।
क्या न समझें
केतु देखकर संन्यास थोपना गलत है। लहसुनिया — रत्न। षड्बल छाया ग्रहों पर सप्त जितना मानक नहीं।
केतु का भाव और राहु से सप्तम देखें
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केतु कमजोर कैसे?
स्थिर नीच राशि मतभेद में है। दुःस्थान, पाप युति, कम दिग्बल — लोक संकेत। राहु से 180° रहता है।
केतु हमेशा अशुभ?
नहीं। वैराग्य, शोध, आध्यात्मिक रुचि की भाषा भी। क्रूर वर्गीकरण अधूरा है।
केतु दशा में नुकसान?
दशा समय है। अलगाव या शोध दोनों कहानियाँ चलती हैं।
लहसुनिया सब?
नहीं। बिना चार्ट न पहनें।
अश्विनी-मघा केतु नक्षत्र?
विंशोत्तरी में अश्विनी और मघा केतु स्वामी हैं। जन्म नक्षत्र अलग लेख में।
निष्कर्ष
केतु अशुभ संकेत कटाव या वैराग्य की भाषा हो सकते हैं। ज़मीन पर काम चार्ट से बड़ा है।
यह चिकित्सा सलाह नहीं है। भ्रम या डिप्रेशन पर चिकित्सक से मिलें।